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Mera sajan
मेरा साजन... मेरा साजन पगला है अकेला है तन से रूठा, मन से झूठा मेरे कान्धे पे रोया है… मुझ से लड़ कर, रात भर जग कर मेरी बाहों में सोया है… प्यार का दानी, करे मनमानी जग को कहे झूठा है ॥ जब भी मांगूं कहे नादानी मन का मगर अनूठा है मेरी चाह को, मेरी आह को कहे उसी की मंशा है सहज सिमट यादों पे मेरी गिराता सदा ही शंपा है रूखे-सूखे मन आंगन में मेरे बहाता प्रेम की गंगा है ॥
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